दीपावली से पहले यूपी के यूपी के शिक्षकों को बड़ा तोहफा: 10 साल का इंतजार खत्म, 70 हजार अध्यापकों का होगा प्रमोशन

Blog
 Image

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए यह दिवाली खुशियों की नई सौगात लेकर आई है। पिछले एक दशक (10 वर्षों) से पदोन्नति की राह देख रहे बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों का इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने प्रदेश के लगभग 70 हजार शिक्षकों को प्रमोशन देने का बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है।

उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे शिक्षकों के लिए बड़ी खबर है। प्रदेश में करीब 70 हजार शिक्षकों की पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है। वर्ष 2016 के बाद से परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की पदोन्नति नहीं हुई थी। ऐसे में करीब एक दशक से इंतजार कर रहे शिक्षकों को अब पदोन्नति मिलने की उम्मीद जगी है। बेसिक शिक्षा परिषद ने सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को वरिष्ठता सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं। बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेंद्र कुमार तिवारी की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार सभी जिलों में पदोन्नति के लिए पात्र शिक्षकों की वरिष्ठता सूची तैयार की जानी है। बीएसए को यह सूची तीन सप्ताह के भीतर तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। तैयार सूची बेसिक शिक्षा परिषद के कार्यालय को 23 अक्तूबर तक भेजनी होगी। इसके बाद नवंबर से पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है। प्रदेश में करीब 3.30 लाख परिषदीय शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें से लगभग 70 हजार शिक्षकों को पदोन्नति का लाभ मिलने की बात कही जा रही है। पदोन्नति की प्रक्रिया वरिष्ठता और निर्धारित नियमों के आधार पर पूरी की जाएगी। इसके लिए जिलावार वरिष्ठता सूची तैयार करना सबसे महत्वपूर्ण चरण होगा। परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों को पदोन्नति के बाद प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक अथवा उच्च प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक का पद मिल सकता है। इसी तरह प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के सहायक अध्यापकों को उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक के पद पर पदोन्नत किए जाने का प्रावधान है। विद्यालयों में प्रधानाध्यापक के पदों की उपलब्धता भी छात्र संख्या से जुड़ी है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में 150 छात्रों पर एक प्रधानाध्यापक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 100 छात्रों पर एक प्रधानाध्यापक का पद स्वीकृत किया गया है। ऐसे में पदोन्नति की प्रक्रिया में स्वीकृत पदों और संबंधित शिक्षकों की पात्रता का भी महत्व रहेगा। शिक्षकों के संगठन लंबे समय से पदोन्नति की मांग उठाते रहे हैं। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष शिव शंकर सिंह और प्रदेश मीडिया प्रभारी बृजेश श्रीवास्तव ने पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू करने के निर्णय का स्वागत किया है। संगठन ने लंबे समय से लंबित मांग पर कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताया। अब जिलों में वरिष्ठता सूची तैयार होने के बाद पदोन्नति की अगली प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। शिक्षकों की नजर 23 अक्तूबर तक सूची भेजे जाने और नवंबर से प्रस्तावित पदोन्नति प्रक्रिया पर रहेगी। यदि निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो करीब एक दशक से पदोन्नति का इंतजार कर रहे हजारों शिक्षकों के लिए यह महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव होगा। इससे विद्यालयों में लंबे समय से रिक्त या पदोन्नति से जुड़े पदों को भरने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ सकती है।