भाजपा का महा-अभियान: 13 जून से विधानसभाओं में उतरेंगे सीएम धामी और केंद्रीय मंत्री,12 साल के विकास का देंगे संदेश

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देहरादून। देश की सत्ता पर लगातार सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के ऐतिहासिक कार्यकाल का जश्न मनाने और पार्टी के जनाधार को पाताल तक मजबूत करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उत्तराखंड में एक बड़े और व्यापक सांगठनिक महा-अभियान का शंखनाद कर दिया है। 13 जून से 16 जून के बीच चलने वाले इस विशेष राष्ट्रव्यापी जनजागरण अभियान के तहत राज्य के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, कोर कमेटी के सदस्य, सांसद और विधायक सीधे जनता के बीच विधानसभा सीटवार दो दिवसीय प्रवास पर रहेंगे।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने अभियान की रूपरेखा साझा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का देश के सर्वाधिक लंबे समय तक प्रधानसेवक बनने का गौरवशाली इतिहास रचना हर नागरिक के लिए गर्व का क्षण है। जनता में इस ऐतिहासिक उपलब्धि को लेकर भारी उत्साह का माहौल है। इसी क्रम में पार्टी 'बारह साल विकास के, जनकल्याण के' मूल मंत्र और संदेश के साथ जनता के द्वार पहुंच रही है। इस अभियान के तहत मोदी सरकार और राज्य की धामी सरकार (डबल इंजन सरकार) के 12 वर्षों के ऐतिहासिक विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं को हर एक मतदाता तक पहुंचाने की विधानसभावार जिम्मेदारी तय कर दी गई है। भाजपा प्रदेश महामंत्री दीप्ति रावत ने बताया कि केंद्रीय नेतृत्व के दिशा-निर्देशों पर प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने सभी वरिष्ठ नेताओं की विधानसभावार ड्यूटियां तय कर दी हैं। 13 से 16 जून के बीच होने वाले इस दो दिवसीय प्रवास में दिग्गजों को चुनावी और सांगठनिक रूप से महत्वपूर्ण सीटें आवंटित की गई हैं। यह अभियान केवल रैलियों और भाषणों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे बेहद सूक्ष्म और प्रभावी स्तर पर डिजाइन किया गया है। क्षेत्र में प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और तमाम वरिष्ठ नेता सीधे बूथ और मंडल स्तर पर जाकर स्थानीय पदाधिकारियों, वरिष्ठ कार्यकर्ताओं और पन्ना प्रमुखों के साथ मैराथन बैठकें करेंगे। इसके साथ ही, नेता सीधे आम जनता के बीच चौपालें लगाएंगे, उनसे सीधा संवाद स्थापित करेंगे और मौके पर ही जन-समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रयास करेंगे। पार्टी का मुख्य उद्देश्य हर वर्ग को सरकार की योजनाओं से जोड़कर आगामी सांगठनिक चुनौतियों के लिए कैडर को पूरी तरह री-चार्ज करना है। इस महा-अभियान से उत्तराखंड की राजनीतिक सरगर्मियां एक बार फिर चरम पर पहुंच गई हैं।