Thursday, June 20, 2024

कौशल विकास में प्रशिक्षण के नाम पर करोड़ों का घोटाला

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उत्तराखंड में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षण के नाम पर धांधली का मामला सामने आया है। आरटीआई कार्यकर्ता विक्की खान ने मामले का खुलासा करते हुए करीब 600 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगाया है। जिससे हड़कंप मचा हुआ है।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में करोड़ों रुपए के घोटाले का मामला सामने आया है। इसका खुलासा समाजसेवी विक्की खान की ओर से सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी से हुआ है। विक्की खान का आरोप है कि कोरोना काल में प्रदेश के करीब 55 हजार छात्रों को प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभाग दिखाकर उन्हें नौकरी तक आवंटित कर दी गई है। इसमें उन्हें लोगों के नाम भी शामिल हैं, जो या तो मर चुके या फिर नौकरी कर रहे हैं। इसके लिए फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल किया गया है। समाजसेवी और आरटीआई कार्यकर्ता विक्की खान ने आरोप लगाया कि बताया कि कौशल विकास प्रशिक्षण योजना के नाम पर धांधली की जा रही है। अकेले कोरोना काल में प्रदेश के 55 हजार छात्रों को प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभाग कराया गया उन्हें नौकरी तक आवंटित कर दी गई। जबकि असल में यह एक पूरा स्कैम है। जिन छात्रों के आधार कार्ड लगाए गए हैं वो पूरी तरह फर्जी हैं। जब इन कागजातों की पड़ताल की गई तो ये फर्जी पाए गए। जिनमें एक आधार कार्ड में अंकित संख्या दूसरे के नाम पर भी अंकित है। आरटीआई कार्यकर्ता विक्की खान का आरोप है कि इस पूरे फर्जीवाड़े के खेल में 600 करोड़ का चूना लगा दिया गया है। जिसमें 200 करोड़ बच्चों के प्रशिक्षण के लिए बजट आया था और 400 करोड़ आईटीआई केंद्रों के लिए रखा गया था। जबकि बाकी अन्य बजट था. इस तरह से युवाओं के साथ छलावा किया गया है। इतना ही नहीं ऐसे लोगों को भी प्रशिक्षण में शामिल कर दिया गया जो अब इस दुनिया में नहीं हैं या फिर किसी सरकारी नौकरी में कार्यरत हैं। बहरहाल यह मामला अब तूल पकड़ने वाला है। जल्द ही आरटीआई कार्यकर्ता इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में रिट दायर करने वाले हैं। उन्होंने संबंधित विभाग पर बाहरी राज्यों के संस्थाओं और कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए ठेका देने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं ने साल 2019 से 2022 तक 55 हजार बच्चों को 600 करोड़ का कोर्स कराया है। जबकि कोरोना काल में सभी स्कूल, कॉलेज और संस्थान बंद चल रहे थे। कौशल विकास योजना के निदेशक संजय कुमार खेतवाल का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में आया है। मामला पुराना बताया जा रहा है फिर भी मामले की जांच के लिए अधिकारियों को निर्देशित कर दिया गया है जो भी तथ्य सामने आएगा। उसके बाद मामले में विभाग की ओर से कार्रवाई की जाएगी।

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