Thursday, June 20, 2024

गुजरात दंगों से जुड़े साजिश मामले में गिरफ्तार एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवाड़ को सुप्रीम कोर्ट से जमानत

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गुजरात दंगों से जुड़े साजिश मामले में गिरफ्तार एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवाड़ को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। शुक्रवार को चीफ जस्टिस यूयू ललित की बेंच में करीब 1 घंटे 10 मिनट से ज्यादा देर तक सुनवाई हुई। आदेश सुनाते हुए चीफ जस्टिस ने कहा कि तीस्ता गिरफ्तारी के बाद से या तो रिमांड या कस्टडी में रहीं। उन्हें अब जेल में नहीं रखा जा सकता है।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि तीस्ता का मामला जब तक हाईकोर्ट के पास है, तब तक उन्हें अपना पासपोर्ट सरेंडर करना होगा। तीस्ता कल यानी शनिवार को कानूनी प्रक्रिया पूरी कर जेल से बाहर आ सकेंगी। 25 जून को अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने सीतलवाड़ को मुंबई से गिरफ्तार किया था। 30 जुलाई को निचली अदालत ने उनकी जमानत खारिज कर दी थी।

गुजरात सरकार ने दाखिल किया था हलफनामा
30 अगस्त को गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर तीस्ता की जमानत का विरोध किया था। सरकार ने कहा- तीस्ता के खिलाफ FIR न केवल सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आधारित है, बल्कि सबूतों द्वारा समर्थित है।

तीस्ता सीतलवाड़ (बाएं) जकिया जाफरी की गुजरात दंगा केस में तीस्ता सीतलवाड़ (बाएं) जकिया जाफरी की सह-याचिकाकर्ता थीं। गुजरात दंगा केस में सह-याचिकाकर्ता थीं। अब तक की गई जांच में FIR को सही ठहराने के लिए उस सामग्री को रिकॉर्ड में लाया गया है, जो स्पष्ट करती है कि आवेदक ने राजनीतिक, वित्तीय और अन्य भौतिक लाभ प्राप्त करने के लिए अन्य आरोपियों के साथ मिलकर आपराधिक कृत्य किए थे।

SC की टिप्पणी के बाद गुजरात पुलिस ने किया था गिरफ्तार
सुप्रीम कोर्ट ने 2002 के गुजरात दंगों के मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट देने वाली SIT रिपोर्ट के खिलाफ याचिका को 24 जून को खारिज कर दिया था। याचिका जकिया जाफरी ने दाखिल की थी। जकिया जाफरी के पति एहसान जाफरी की इन दंगों में मौत हुई थी।

कोर्ट ने कहा कि जकिया की याचिका में मेरिट नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि मामले में को-पेटिशनर तीस्ता ने जकिया जाफरी की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया। कोर्ट ने तीस्ता की भूमिका की जांच की बात कही थी। जिसके बाद अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने 25 जून को तीस्ता को मुंबई से गिरफ्तार कर लिया था।

तीस्ता सीतलवाड की ओर से कपिल सिब्बल ने कहा कि, 124 लोगों को उम्रकैद हुई है. ये कैसे कह सकते हैं कि गुजरात में कुछ नहीं हुआ. ये सब एक उद्देश्य के लिए है. ये चाहते हैं कि तीस्ता ताउम्र जेल से बाहर ना आए. सिब्बल ने कहा कि, 20 साल से सरकार क्या करती रही. ये हलफनामे 2002-2003 के हैं. तो ये जालसाजी कैसे हो गए? ये हलफनामे इस केस में दाखिल नहीं किए गए. ये पहले के केसों में फाइल किए गए थे.

कपिल सिब्बल ने कहा कि, मैंने जज, न्यायपालिका पर आरोप नहीं लगाया है. मैं कुछ भी नहीं कर रहा हूं. मुझे कानून अधिकारी से इसकी उम्मीद नहीं है. यह सब प्रेरित है. अगर वे टाइप किए हुए भी हैं, तो इसमें जालसाजी कैसे आ सकती है? यदि जालसाजी आती है तो जालसाजी की शिकायत करने वाले व्यक्ति को न्यायालय अवश्य आना चाहिए. लेकिन राज्य यहां आकर कह रहा है. यह दुर्भावनापूर्ण है, प्रेरित है और मैंने जो किया वह जनता के बड़े हित में है. इस वजह से मेरी गिरफ्तारी हुई है. ये हलफनामे कुछ अन्य मामलों में दायर किए गए हैं. यह कुछ अन्य मामलों में NHRC के समर्थन में SC के समक्ष दायर हलफनामे हैं. तो क्या NHRC प्रेरित था, मैं प्रेरित. यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. मामला इस अदालत के सामने आया और अदालत ने मुझे कुछ राहत दी.

सिब्बल ने कहा, सभी मामलों में उन्होंने मुझे निशाना बनाया है. मैं राज्य की नंबर 1 दुश्मन हूं. और वो कहते हैं कि मैं एक शक्तिशाली व्यक्ति हूं. मैं राज्य से शक्तिशाली कैसे हो सकती हूं. वह 60 साल की है, वह क्या कर सकती है? सिब्बल ने कहा- ये अभियोजन नहीं अत्याचार है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तीस्ता 25 जून 2022 को गिरफ्तार की गई थीं और अब तक हिरासत में हैं. FIR में सुप्रीम कोर्ट के 24 जून के फैसले समेत कई कार्रवाइयों का जिक्र है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फिर उसने जमानत के लिए ट्रायल कोर्ट में अर्जी लगाई. अर्जी खारिज कर दी. ऐसी ही जमानत अर्जी आरबी श्रीकुमार ने भी दाखिल की. ट्रायल कोर्ट ने 13 जुलाई को दोनों जमानत अर्जी खारिज कर दीं. फिर तीस्ता ने गुजरात हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, हाईकोर्ट ने तीन अगस्त को नोटिस जारी किया और सुनवाई 19 सितंबर को तय की. तीस्ता की अंतरिम जमानत की मांग नहीं मानी गई. दोनों फैसलों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की.

सुप्रीम कोर्ट ने तीस्ता सीतलवाड़ को जमानत देते हुए कहा कि तीस्ता को जल्द से जल्द संबंधित ट्रायल कोर्ट में पेश किया जाए. ट्रायल कोर्ट जमानत की शर्तें तय कर जमानत दे. तीस्ता को पासपोर्ट सरेंडर करने का आदेश दिया और कहा कि तीस्ता जांच में सहयोग करेंगी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, हमने सिर्फ अंतरिम बेल पर मामले में विचार किया है. हमने मेरिट पर कोई राय नहीं दी है. हाईकोर्ट मेरिट पर स्वतंत्रता से विचार करेगा. वो सुप्रीम कोर्ट की टिप्पिणियों से प्रभावित नहीं होगा. ये फैसला मामले के इस तथ्य कि वो एक महिला है, इसका असर मामले के दूसरे आरोपियों पर नहीं पड़ेगा. कोर्ट ने कहा कि, ये ट्रायल कोर्ट के लिए खुला होगा कि वो जमानत के लिए बॉन्ड के लिए कैश पर विचार करे, लोकल श्योरटी पर जोर ना दे.

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