Tuesday, April 23, 2024

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पर नई शराब नीति पड़ रही भारी, भूमिका पर उठा रहे सवाल

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नई दिल्ली. दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पर नई शराब नीति भारी पड़ रही है. सीबीआई द्वारा शुक्रवार को दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 में कथित भ्रष्टाचार के सिलसिले में उनके आवास पर छापा मारा. जिसके बाद केजरीवाल के भरोसेमंद सिसौदिया को नंबर एक आरोपी बनाया गया और अब वित्तीय धोखाधड़ी के आरोपों का सामना भी करना पड़ सकता है.

8 जुलाई को दिल्ली के मुख्य सचिव नरेश कुमार ने उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को एक रिपोर्ट सौंपी थी. जिसमें सिसोदिया पर कमीशन के बदले में शराब की दुकान के लाइसेंसधारियों को अनुचित लाभ देने का आरोप लगाया गया था. कहा गया कि आप ने फरवरी के पंजाब विधानसभा चुनाव में कथित तौर पर इससे हासिल फंड का इस्तेमाल किया था. एलजी सक्सेना के सीबीआई जांच की सिफारिश करने के तुरंत बाद सिसोदिया ने 30 जुलाई को घोषणा की कि 1 अगस्त से नई आबकारी नीति को खत्म कर दिया जाएगा. जिससे केवल सरकारी शराब वेंडर ही दिल्ली में शराब बेच सकेंगे.

आबकारी नीति, 2021-22 क्या है?

नई आबकारी नीति के लिए अपने नीति दस्तावेज में दिल्ली सरकार ने कहा था कि दिल्ली में कोई भी नई शराब की दुकान नहीं खोली जाएगी. सरकार कोई ठेका नहीं चलाएगी. शहर भर में 849 दुकानों के लिए निजी बोली लगाने वालों को खुदरा लाइसेंस जारी किए जाएंगे, जिन्हें 32 क्षेत्रों में विभाजित किया जाएगा. बाजारों, मॉल, वाणिज्यिक सड़कों/क्षेत्रों, स्थानीय शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और ऐसे अन्य स्थानों में स्टोर खोलने की अनुमति दी गई. सरकार ने लाइसेंसधारियों के लिए नियमों को भी लचीला बनाया. जैसे कि उन्हें छूट की पेशकश करने की अनुमति देना और सरकार द्वारा निर्धारित एमआरपी पर बेचने के बजाय अपनी कीमतें निर्धारित करना. इसके बाद विक्रेताओं ने छूट की पेशकश की, जिसने भीड़ बढ़ी. विरोध के बाद आबकारी विभाग ने कुछ समय के लिए छूट वापस ले ली. बहरहाल इस पूरी नीति को 1 अगस्त को ही वापस ले लिया गया था.

आरोप क्या हैं?

मुख्य सचिव की रिपोर्ट के अनुसार सिसोदिया को कथित तौर पर आबकारी नीति के प्रमुख निर्णयों को क्रियान्वित करने के लिए वित्तीय धोखाधड़ी के आरोपों का सामना करना पड़ सकता है. खबरों के मुताबिक उन पर टेंडर दिए जाने के बाद शराब लाइसेंसधारियों को अनुचित वित्तीय लाभ देने का आरोप है. आबकारी विभाग ने कथित तौर पर महामारी का बहाना बताते हुए निविदा लाइसेंस शुल्क पर लाइसेंसधारियों को 144.36 करोड़ रुपये की छूट दी. उसने हवाईअड्डा अधिकारियों से एनओसी हासिल करने में विफल रहने के बावजूद हवाईअड्डा क्षेत्र के लाइसेंस के लिए सबसे कम बोली लगाने वाले को 30 करोड़ रुपये की बयाना राशि कथित रूप से वापस कर दी.

इस तरह के कदम ने दिल्ली आबकारी नियम, 2010 के नियम 48(11)(बी) का उल्लंघन किया है. जिसमें कहा गया है कि सफल बोली लगाने वाले को लाइसेंस हासिल करने के लिए सभी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी. ऐसा न करने पर उसके द्वारा जमा की गई पूरी रकम को सरकार जब्त कर लेगी. ये भी कहा गया है कि सिसोदिया के तहत आबकारी विभाग ने अपने 8 नवंबर, 2021 के आदेश में विदेशी शराब की दरों के फार्मूले को संशोधित किया. बीयर पर प्रति केस 50 रुपये के आयात पास शुल्क की लेवी को सक्षम प्राधिकरण की मंजूरी के बिना हटा दिया गया. जिससे खुदरा विक्रेताओं के लिए यह सस्ता हो गया और राज्य के खजाने को राजस्व का नुकसान हुआ.

सीबीआई ने क्या कहा है?
जांच एजेंसी ने अब खत्म हो चुकी नीति के संबंध में दर्ज एफआईआर में 15 लोगों को नामजद किया है, जिसमें सिसोदिया का नाम सबसे ऊपर है. एफआईआर में सिसोदिया के साथ दिल्ली के तत्कालीन आबकारी आयुक्त अरवा गोपी कृष्ण और आबकारी विभाग के दो अन्य वरिष्ठ अफसरों के नाम शामिल हैं.

आप का रूख क्या है?

सिसोदिया ने छापे के बारे में कहा कि ‘सीबीआई अधिकारियों ने लगभग 14 घंटे की लंबी छापेमारी के बाद उनका कंप्यूटर और मोबाइल फोन जब्त कर लिया और कुछ फाइलें भी ले लीं. हमने कोई भ्रष्टाचार या गलत काम नहीं किया है. हम चिंतित नहीं हैं. हम जानते हैं कि सीबीआई का दुरुपयोग किया जा रहा है.’ जबकि अरविंद केजरीवाल ने छापे को देश भर में आप के पैर जमाने और अपनी कल्याणकारी नीतियों के लिए पहचाने जाने पर भाजपा के डर की एक पहचान बताया. आप नेता राघव चड्ढा ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सिसोदिया के आवास पर छापे से केवल नोटबुक, पेंसिल और ज्योमेट्री बॉक्स का पता चलेगा.

बीजेपी का आरोप

दिल्ली भाजपा ने शुक्रवार को आप सरकार पर करोड़ों रुपये के शराब घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाया. भाजपा ने केजरीवाल को सिसोदिया के साथ-साथ एक अन्य मंत्री सत्येंद्र जैन को उनके पदों से हटाने की मांग की. जो मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में जेल में हैं. दिल्ली भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और उत्तर पूर्वी दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि सीबीआई को यह भी जांच करनी चाहिए कि क्या आबकारी नीति सत्ताधारी पार्टी के लिए अपने काले धन को सफेद करने का माध्यम थी. तिवारी ने आरोप लगाया कि आप ने पंजाब, उत्तराखंड और अन्य राज्यों में नई आबकारी नीति में घोटाले से जुटाए गए करोड़ों रुपये के कमीशन से चुनाव लड़ा था.

 

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