Apr 05, 2026

अपनी गणना-अपने गांव अभियान: प्रवासियों को मूल गांवों से जोड़ने का संकल्प, पहाड़ की राजनीतिक ताकत बचाने की कवायद

post-img

देहरादून। वर्ष 2027 की जनगणना को सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए उत्तराखंड को कुल 32 हजार ब्लॉकों में बांट दिया गया है। राज्य में प्रत्येक 800 आबादी या 200 घरों को एक ब्लॉक बनाया गया है। इस विशाल अभियान के लिए करीब 30 हजार कर्मचारियों को तैनात किया जा रहा है। जनगणना निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि एक राजस्व ग्राम को एक ब्लॉक के रूप में चिह्नित किया गया है। यदि किसी ग्राम की आबादी 800 से अधिक है तो वहां दो ब्लॉक बनाए गए हैं।

जनगणना का पहला चरण 10 अप्रैल से शुरू हो रहा है। इसके तहत 10 से 24 अप्रैल तक लोग जनगणना विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करा सकेंगे (स्वगणना)। इसके बाद 25 अप्रैल से 24 मई तक पूरे राज्य में भवन गणना (House Listing) का कार्य किया जाएगा। निदेशक श्रीवास्तव ने बताया कि भवन गणना के दौरान आम नागरिकों से कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे, जिन्हें पांच श्रेणियों में बांटा गया है। इनमें मकान की बनावट, परिवार और मुखिया की जानकारी, बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं, संपत्ति एवं वाहन, खान-पान तथा संचार माध्यमों की जानकारी शामिल है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोगों द्वारा दी गई सभी सूचनाएं पूर्णतः गोपनीय रखी जाएंगी। कर्मचारियों के प्रशिक्षण का कार्य सोमवार 6 अप्रैल से शुरू हो रहा है। तीन-तीन दिनों के प्रशिक्षण सत्रों के लिए राज्यभर में 239 तहसील व अन्य सरकारी भवनों को चिह्नित किया गया है।

इधर, जनगणना को लेकर पर्वतीय क्षेत्रों में चिंता भी जताई जा रही है। शनिवार को देहरादून प्रेस क्लब में ‘अपनी गणना-अपने गांव’ अभियान के तहत हुई बैठक में डॉ. आरपी रतूड़ी की अध्यक्षता में चर्चा हुई। वक्ताओं ने चिंता व्यक्त की कि यदि पलायन के कारण पर्वतीय जिलों की जनसंख्या इसी गति से घटती रही तो 2027 की जनगणना के आधार पर आगामी परिसीमन में पहाड़ की राजनीतिक ताकत काफी कम हो जाएगी। आंकड़ों के अनुसार, यदि वर्तमान रुझान जारी रहा तो नौ पर्वतीय जिलों की विधानसभा सीटें घटकर मात्र 39 रह सकती हैं, जबकि चार मैदानी जिलों की सीटें बढ़कर 66 तक पहुंच सकती हैं। बैठक में संकल्प लिया गया कि 2027 की जनगणना में प्रवासियों को उनके मूल गांवों से जोड़ने के प्रयास किए जाएंगे। लगभग 5 से 6 लाख प्रवासियों को यदि मूल गांवों की गणना में शामिल किया जा सके तो पहाड़ के प्रतिनिधित्व को बचाया जा सकता है। इस उद्देश्य से ग्रामीण स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने और प्रवासियों से संवाद स्थापित करने के लिए एक संयोजक मंडल का गठन भी किया गया है। वक्ताओं ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़े नहीं, बल्कि भविष्य के बजट आवंटन, विकास योजनाओं और राजनीतिक परिसीमन का आधार होती है। इसलिए पर्वतीय क्षेत्रों के अस्तित्व और भविष्य को बचाने के लिए हर स्तर पर प्रयास जरूरी हैं। जनगणना निदेशालय ने लोगों से अपील की है कि वे स्वगणना के दौरान पोर्टल पर सही जानकारी दर्ज करें और भवन गणना के समय पूछे जाने वाले प्रश्नों का सही-सही उत्तर दें।