Feb 21, 2026

भविष्य के युद्ध में साइबर और इंटेलिजेंस की भूमिका अहम, सीडीएस ने बताई नई दिशा

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श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जनपद स्थित हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर में आयोजित विशेष कार्यक्रम में भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) अनिल चौहान ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर विस्तृत व्याख्यान दिया। इस दौरान उन्होंने बदलते वैश्विक परिदृश्य, परमाणु संतुलन, साइबर युद्ध और भारत की सामरिक सोच पर गंभीर चर्चा करते हुए युवाओं को रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। सीडीएस ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सैन्य शक्ति तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह कूटनीति, अर्थव्यवस्था, तकनीक और समाज की सामूहिक भागीदारी से जुड़ा व्यापक आयाम है। उन्होंने उस धारणा को खारिज किया कि भारत में सामरिक शोध की कमी रही है। उनके अनुसार, पौराणिक काल से ही भारत में युद्ध और राज्य संचालन को लेकर समृद्ध चिंतन परंपरा रही है। धनुर्वेद में व्यूह रचना और सैन्य संचालन का उल्लेख मिलता है, जबकि अर्थशास्त्र और चाणक्य नीति में राज्य सुरक्षा, शक्ति संतुलन और कूटनीति की स्पष्ट रणनीतियां वर्णित हैं। उन्होंने कहा कि चाणक्य की रणनीतिक दृष्टि आज भी भारत की विदेश नीति और राष्ट्रीय सोच में परिलक्षित होती है।

इतिहास की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मुगल काल के दौरान लगभग 800 वर्षों तक भारत की सामरिक सोच कमजोर पड़ी रही। वर्ष 1947 में देश भौतिक रूप से स्वतंत्र हुआ, किंतु मानसिक स्वतंत्रता प्राप्त करने में समय लगा। उन्होंने युवाओं से मौलिक और स्वदेशी रणनीतिक सोच विकसित करने की अपील की। उनका कहना था कि केवल पश्चिमी युद्ध सिद्धांतों की नकल कर स्थायी सफलता प्राप्त नहीं की जा सकती। हथियारों, युद्ध नीति और रणनीति में आत्मनिर्भरता ही निर्णायक बढ़त दिला सकती है। राष्ट्रीय सुरक्षा की संरचना को स्पष्ट करते हुए सीडीएस ने तीन प्रमुख घेरों का उल्लेख किया। पहला बाहरी घेरा दीर्घकालीन रणनीतिक आकलन से जुड़ा है, जिसमें कूटनीति, आर्थिक शक्ति और तकनीकी विकास शामिल हैं। दूसरा मध्य घेरा रक्षा व्यवस्था और सैन्य क्षमताओं से संबंधित है। तीसरा आंतरिक घेरा आत्मनिर्भरता, सैन्य संरचना और युद्ध योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि आज युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पारंपरिक युद्धों के साथ-साथ अब इंटेलिजेंस, साइबर स्पेस और सूचना आधारित युद्ध अत्यंत महत्वपूर्ण हो गए हैं। भारत के सामने दो परमाणु संपन्न पड़ोसी देशों की चुनौती है, जिन्होंने भारतीय भूमि पर अवैध अतिक्रमण किया है। परमाणु संतुलन के कारण लंबे पारंपरिक युद्ध की संभावना कम होती है, लेकिन आतंकवाद, सीमा विवाद और आंतरिक अस्थिरता जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। सीडीएस ने जोर देकर कहा कि देश को दीर्घकालीन युद्ध की तैयारी के साथ-साथ छोटे, सटीक और स्मार्ट युद्ध की रणनीति अपनानी होगी। तकनीक आधारित, तेज और लक्ष्य केंद्रित अभियानों के माध्यम से ही भविष्य की चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने छात्र-छात्राओं के साथ संवाद किया और उनके प्रश्नों के उत्तर दिए। इस अवसर पर राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर और बौद्धिक चर्चा देखने को मिली, जिसने युवाओं में सामरिक सोच और राष्ट्रहित के प्रति नई जागरूकता पैदा की।