जेपीएससी-जेएसएससी विवाद पर सीएम सोरेन का बड़ा संदेश, बोले- युवाओं को राजनीतिक संरक्षण नहीं, मिलेगा न्याय

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रांची। झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी  परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार चर्चा में है। इस बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने युवाओं से राजनीतिक संरक्षण से दूर रहने की अपील करते हुए भरोसा दिलाया है कि उनके अधिकार और न्याय के लिए सरकार कार्रवाई करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं का अधिकार है कि उन्हें उनका हक मिले और यदि परीक्षा व्यवस्था में किसी तरह की अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की ओर से अनियमितताओं को उजागर किए जाने के कारण ही युवाओं में गलत काम के खिलाफ आवाज उठाने और अपने अधिकारों के लिए आंदोलन करने का साहस आया है। उन्होंने कहा कि झारखंड के युवा अपने अधिकारों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकार उनकी बात को गंभीरता से ले रही है। हेमंत सोरेन ने कहा कि कुछ लोगों की बड़ी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हैं और इन्हीं महत्वाकांक्षाओं के चलते राजनीतिक दल युवा पीढ़ी को गुमराह करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि देशभर में अलग-अलग राजनीतिक दल युवाओं को प्रभावित करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं और सच में झूठ मिलाकर उन्हें भ्रमित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने युवाओं से अपील की कि वे अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं, लेकिन किसी राजनीतिक संरक्षण या बहकावे में आने से बचें। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि युवाओं को न्याय मिले। परीक्षा में अनियमितता के लिए जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ सबसे कड़ी संभव कार्रवाई की जाएगी। इधर,जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों और सरकार के बीच हुई बैठक भी समाप्त हो गई। बैठक में परीक्षा प्रक्रिया को लेकर कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करने, बैकलॉग परीक्षाओं की जांच और परीक्षा प्रक्रिया में सुधार के प्रस्ताव पर चर्चा हुई है। परीक्षा से जुड़े कथित पैसों के लेन-देन की जांच प्रवर्तन निदेशालय से कराने पर भी सहमति बनने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा टीडीपीएल एजेंसी की ओर से संचालित कराई गई परीक्षाओं की जांच कराने की बात भी सामने आई है। बैठक में कथित तौर पर तीन परीक्षाओं को रद्द करने का प्रस्ताव भी सामने आया है। साथ ही पूरे मामले की जांच कर रही सीआईडी को 90 दिनों के भीतर रिपोर्ट देने और एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित करने की बात भी कही गई है। हालांकि बैठक में चर्चा किए गए इन प्रस्तावों पर अभी सरकार और छात्र पक्ष की ओर से आधिकारिक रूप से अंतिम घोषणा नहीं की गई है। सरकार ने छात्रों को सामने रखे गए प्रस्तावों पर विचार करने के लिए समय दिया है। ऐसे में अब अभ्यर्थियों के अगले कदम पर सभी की निगाहें टिकी हैं। जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच सरकार और छात्रों की बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर सरकार जांच और दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दे रही है, वहीं अभ्यर्थी परीक्षा रद्द करने, अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग पर कायम हैं। अब छात्रों द्वारा सरकार के प्रस्तावों पर क्या फैसला लिया जाता है, यह आंदोलन की अगली दिशा तय करेगा। यदि प्रस्तावों पर सहमति बनती है तो विवाद के समाधान की राह खुल सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय छात्रों की ओर से लिए जाने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।