Apr 25, 2026

महंगी बिजली और कम आपूर्ति: उत्तराखंड में गहराया ऊर्जा संकट, पीक आवर्स में बिजली जुटाना यूपीसीएल के लिए चुनौती

post-img

उत्तराखंड में सूर्यदेव के तल्ख तेवरों ने न केवल पारा चढ़ाया है, बल्कि प्रदेश की बिजली व्यवस्था को भी पसीने छुड़ा दिए हैं। शुक्रवार को प्रदेश में बिजली की मांग इस महीने के उच्चतम स्तर को छूते हुए रिकॉर्ड 5 करोड़ यूनिट के पार पहुंच गई। मांग के मुकाबले बिजली की उपलब्धता कम होने के कारण उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड को पर्वतीय क्षेत्रों को छोड़कर पूरे प्रदेश में घंटों की अघोषित कटौती का सहारा लेना पड़ रहा है। आंकड़ों पर गौर करें तो अप्रैल की शुरुआत से अब तक मांग में 90 लाख यूनिट से अधिक का इजाफा हो चुका है। शुक्रवार को स्थिति यह रही कि राज्य और केंद्रीय पूल को मिलाकर यूपीसीएल के पास मात्र 2.7 करोड़ यूनिट बिजली उपलब्ध थी। बाजार और अन्य माध्यमों से महंगी बिजली खरीदने के बावजूद विभाग केवल 4.6 करोड़ यूनिट ही जुटा पाया। नतीजतन, करीब 30 लाख यूनिट की कमी के चलते राज्य के औद्योगिक और घरेलू क्षेत्रों में कटौती की गाज गिरी।

बिजली की कमी का सबसे बुरा असर हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर के ग्रामीण इलाकों में देखने को मिला, जहां ढाई घंटे तक बिजली गुल रही। लंढौरा, मंगलौर, लक्सर, बहादराबाद, विकासनगर, डोईवाला, जसपुर, किच्छा, खटीमा, रामनगर और बाजपुर जैसे क्षेत्रों में 2 से 2.5 घंटे की कटौती हुई। काशीपुर में एक घंटा, रुड़की व हल्द्वानी में डेढ़ घंटा और ज्वालापुर में सवा घंटे की कटौती दर्ज की गई। बिजली संकट का सबसे बड़ा झटका स्टील उद्योगों को लगा है, जहां करीब 12 घंटे की बिजली कटौती की जा रही है, जिससे उत्पादन ठप होने की कगार पर है। यूपीसीएल के अधिकारियों के अनुसार, जिस रफ्तार से गर्मी बढ़ रही है, अगले एक सप्ताह में मांग 5.5 करोड़ यूनिट तक पहुंचने की संभावना है। चिंता की बात यह है कि बाजार में बिजली न केवल महंगी मिल रही है, बल्कि 'पीक आवर' (सर्वाधिक मांग के समय) में इसकी उपलब्धता भी बेहद कम है। ऐसे में आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को और भी लंबे पावर कट झेलने पड़ सकते हैं। फिलहाल विभाग अतिरिक्त बिजली जुटाने के लिए जद्दोजहद कर रहा है, लेकिन फिलहाल राहत के आसार कम ही दिख रहे हैं।