झारखंड सूचना आयोग में 'ताला' तो खुला पर अभी नहीं होगी सुनवाई: 4 नए आयुक्तों ने संभाला पदभार, लेकिन मुख्य आयुक्त के बिना गाड़ी अटकी

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रांची। झारखंड राज्य सूचना आयोग में पिछले छह वर्षों से चली आ रही अफसरों की कमी आखिरकार दूर हो गई है। लोकभवन में भव्य शपथ ग्रहण समारोह के बाद नवनियुक्त चारों सूचना आयुक्तों अनुज सिन्हा, शिवपूजन पाठक, तनुज खत्री और अमूल नीरज खलखो ने बुधवार को कार्यालय पहुंचकर अपना-अपना पदभार ग्रहण कर लिया। इस दौरान आयोग के संयुक्त सचिव सुदेश कुमार वर्मा ने सभी प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी कराईं। हालांकि, नए आयुक्तों के आने से दफ्तर तो गुलजार हो गया है, लेकिन आम जनता को अपनी अपीलों पर सुनवाई के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना होगा।

दरअसल, आयोग में नए सूचना आयुक्तों की ज्वाइनिंग तो हो गई है, लेकिन 'मुख्य सूचना आयुक्त' (चीफ इंफॉर्मेशन कमिश्नर) का पद अब भी खाली है। संयुक्त सचिव सुदेश कुमार वर्मा ने बताया कि नियमानुसार मुख्य सूचना आयुक्त की अनुपस्थिति में आयोग की न्यायिक और वित्तीय शक्तियां किसी के पास नहीं होती हैं। अब सुनवाई शुरू करने का एकमात्र रास्ता यह है कि कार्मिक विभाग इन चारों नवनियुक्त आयुक्तों में से किसी एक को 'प्रभारी मुख्य सूचना आयुक्त' मनोनीत करे। जब तक कार्मिक विभाग से इसकी प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों की अधिसूचना (नोटिफिकेशन) जारी नहीं होती, तब तक मामलों की आधिकारिक सुनवाई तकनीकी रूप से शुरू नहीं की जा सकती। झारखंड सूचना आयोग में न्याय की आस लगाए बैठे लोगों के आवेदनों का एक विशाल पहाड़ खड़ा हो चुका है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, आयोग में आखिरी बार सुनवाई 8 मई 2020 को हुई थी। उसके बाद से लगातार पद रिक्त होने के कारण फाइलों पर धूल जमती गई। वर्तमान में स्थिति यह है कि पहले से लंबित अपीलों की संख्या 7,657 और शिकायतों की संख्या 71 है। वहीं, इस बीच आए नए आवेदनों की संख्या बढ़कर 15,304 हो चुकी है। कुल मिलाकर करीब 23,000 अपील और 400 से अधिक शिकायतें पेंडिंग हैं। इनमें से कई मामले तो ऐसे हैं जो निचले स्तर के अधिकारियों की लापरवाही के कारण पिछले 10 वर्षों से लटके हुए हैं। पदभार ग्रहण करने के बाद चारों नए आयुक्तों ने जनता को समय पर सूचना दिलाने और पेंडिंग केसों को खत्म करने का अपना विजन सामने रखा। अनुज सिन्हा ने कहा कि सभी चारों आयुक्त आपस में बेहतर तालमेल बिठाकर लंबित मामलों का निपटारा करेंगे। बदलते दौर के साथ अब ऑनलाइन सुनवाई शुरू की जाएगी, ताकि सुदूर जिलों से आने वाले फरियादियों और अफसरों का समय और पैसा बच सके। शिवपूजन पाठक ने जोर दिया कि आरटीआई (RTI) कानून जिस पारदर्शिता के उद्देश्य से बना था, उसका सीधा लाभ धरातल पर हर नागरिक को मिलना चाहिए। तनुज खत्री ने एक बेहतरीन सुझाव देते हुए कहा कि अगर सरकारी विभाग अपनी वेबसाइटों और डिजिटल माध्यमों पर खुद ही जानकारियां (सुओ-मोटो) डाल दें, तो आयोग में आने वाली अपीलों की संख्या अपने आप आधी हो जाएगी। अमूल नीरज खलखो ने आश्वस्त किया कि वर्षों से लंबित पड़े पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर तेजी से निपटाया जाएगा ताकि जनता का भरोसा सिस्टम पर बहाल हो सके।