Mar 09, 2026

चंपावत में बनेगा महिला स्पोर्ट्स कॉलेज: खेल क्षेत्र में बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए बजट में 10 करोड़

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देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में महिला सशक्तीकरण पर विशेष जोर देते हुए जेंडर बजट में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। इस बार जेंडर बजट बढ़ाकर 19,692.02 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में 16,961.32 करोड़ रुपये था। सरकार ने महिलाओं, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई योजनाओं में बजटीय प्रावधान किए हैं। बजट में नंदा गौरा योजना के लिए 220 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के लिए 47.78 करोड़ रुपये और मुख्यमंत्री बाल पोषण योजना के लिए 25 करोड़ रुपये रखे गए हैं। महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना के लिए 30 करोड़ रुपये तथा मुख्यमंत्री महिला पोषण योजना के लिए 13.44 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा मुख्यमंत्री आंचल अमृत योजना के लिए 15 करोड़ रुपये, मुख्यमंत्री बाल एवं महिला बहुमुखी विकास निधि के लिए 8 करोड़ रुपये तथा निराश्रित विधवाओं की पुत्रियों के विवाह के लिए 5 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। अल्पसंख्यक समुदाय की मेधावी बालिकाओं को प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक मेधावी बालिका प्रोत्साहन योजना में 3.76 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना के लिए 5 करोड़ रुपये और गंगा गाय महिला डेरी विकास योजना के लिए भी 5 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। वहीं प्रसूता महिलाओं के लिए संचालित ईजा-बोई शगुन योजना के लिए कुल 122 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार ने महिलाओं के खेल क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए चंपावत में महिला स्पोर्ट्स कॉलेज के निर्माण हेतु 10 करोड़ रुपये का बजट भी निर्धारित किया है। इसके अलावा मुख्यमंत्री महिला सतत आजीविका योजना के लिए 2 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। गौरतलब है कि उत्तराखंड में जेंडर बजट का दायरा लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2021-22 में यह कुल बजट का करीब 12 प्रतिशत था, जो 2022-23 में 13.77 प्रतिशत और 2023-24 में लगभग 14 प्रतिशत तक पहुंच गया। वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 16 प्रतिशत हुआ, जबकि 2025-26 में करीब 17 प्रतिशत रहा। प्रदेश सरकार का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना, स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करना और उनके उत्पादों की मार्केटिंग व ब्रांडिंग को बढ़ावा देना है। सरकार का मानना है कि इन योजनाओं के माध्यम से राज्य में महिला सशक्तीकरण को नई दिशा मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।