रविवार और सरकारी छुट्टी के दिन नहीं गुल होगी बिजली प्रीपेड स्मार्ट मीटर में मिलेगी नेगेटिव बैलेंस की सुविधा

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देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में बिजली व्यवस्था को आधुनिक बनाने और 'स्मार्ट प्रीपेड मीटर' के प्रति जनता का रुझान बढ़ाने के लिए राहतों का पिटारा खोल दिया है। राज्य के करीब 30 लाख उपभोक्ताओं को डिजिटल सिस्टम से जोड़ने के लिए सरकार ने तीन धमाकेदार ऑफर पेश किए हैं। इन नई रियायतों का उद्देश्य न केवल उपभोक्ताओं का पैसा बचाना है, बल्कि उन्हें बिजली कटौती के डर से मुक्त करना भी है।

सरकार ने घोषणा की है कि जो भी उपभोक्ता अपने घर में प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगवाएंगे,उन्हें कुल बिजली बिल पर 4 प्रतिशत की नकद छूट दी जाएगी। यह छूट हर महीने के बिल पर लागू होगी, जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों को सालाना बड़ी बचत करने का मौका मिलेगा। सबसे बड़ी राहत उन लोगों के लिए है जिन्हें डर रहता था कि बैलेंस खत्म होते ही घर में अंधेरा हो जाएगा। सरकार ने अब नियम बदल दिए हैं।  शाम 6 बजे से सुबह 8 बजे के बीच बैलेंस खत्म होने पर भी कनेक्शन नहीं काटा जाएगा। इससे बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों की देखभाल में कोई बाधा नहीं आएगी। रविवार, महीने के दूसरे शनिवार या किसी भी सरकारी अवकाश के दिन बिजली गुल नहीं होगी,चाहे बैलेंस माइनस में ही क्यों न चला जाए। 1 किलोवाट तक के कनेक्शन वाले छोटे उपभोक्ताओं की बिजली बैलेंस खत्म होने के बाद भी 30 दिनों तक नहीं कटेगी। स्मार्ट मीटर धारकों के लिए अब 'नेगेटिव बैलेंस' की सुविधा शुरू की गई है। यानी अगर आपका रिचार्ज खत्म हो गया है और आपके पास तुरंत पैसे नहीं हैं, तो विभाग आपको 200 रुपये तक की बिजली उधार देगा। यह उधार ली गई राशि आपके अगले रिचार्ज से अपने आप कट जाएगी। इसके अलावा, कनेक्शन काटने से पहले उपभोक्ता को 5 एसएमएस अलर्ट भेजना अनिवार्य कर दिया गया है। उत्तराखंड में फिलहाल स्मार्ट मीटरिंग की रफ्तार काफी धीमी है। 30 लाख बिजली कनेक्शनों में से अब तक केवल 1500 स्मार्ट मीटर ही लग पाए हैं। फिलहाल यह प्रक्रिया सरकारी दफ्तरों और विभागीय भवनों से शुरू की गई है। शहरी क्षेत्रों में कुछ चुनिंदा घरेलू उपभोक्ताओं को पायलट प्रोजेक्ट के तहत जोड़ा गया है। ऊर्जा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इन आकर्षक ऑफर्स के बाद उपभोक्ताओं में प्रीपेड मीटर को लेकर हिचकिचाहट खत्म होगी। सरकार का लक्ष्य है कि लोग स्वेच्छा से आवेदन कर स्मार्ट मीटर अपनाएं, ताकि उन्हें न केवल बिल में छूट मिले बल्कि बिजली की बर्बादी पर भी लगाम लगे।