Tuesday, April 23, 2024

बहुविवाह क्या है जानिए

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हिंदुस्तान में बहुविवाह की परंपरा कई सालों से चली आ रही है और यह एक महत्वपूर्ण हिंदू विवाह प्रथा है जो विवाहित जीवन की महत्वपूर्ण हिस्सा है। बहुविवाह का अर्थ है कि एक पुरुष एक से अधिक महिलाओं से विवाह कर सकता है और उन्हें अपनी पत्नियों के साथ एक साथ रहने का अधिकार होता है। इस प्रथा का इतिहास बहुत पुराना है और इसका पालन हिंदू धर्म के आधारित होता है। इस लेख में हम हिंदुस्तान में बहुविवाह की परंपरा के इतिहास, कारण, और वर्तमान परिपर्णा को समझेंगे।



बहुविवाह की परंपरा का इतिहास:

बहुविवाह की परंपरा का इतिहास हिंदू धर्म के प्राचीन ग्रंथों और पुराणों में मिलता है। इस परंपरा के अनुसार, एक पुरुष को एक से अधिक पत्नियां प्राप्त हो सकती हैं, लेकिन यह प्रथा विशेष निर्वाचनों और धार्मिक आदर्शों के साथ आती है। इसके बावजूद, इस प्रथा का इतिहास में कई विवाद हैं। यह कहा जाता है कि महाभारत काल में भी इस प्रथा का पालन हुआ था, और पांडवों के पांच भारतीय पतियों की कथा इस प्रथा का एक उदाहरण हो सकता है।

कारण:

बहुविवाह की परंपरा के कई कारण हैं। पहला कारण धार्मिक है, जिसमें यह माना जाता है कि धार्मिक ग्रंथों में इसकी अनुमति है और यह एक पुरुष को उसके अधिकार के तहत एक से अधिक पत्नियों को लेने की अनुमति देता है। दूसरा कारण सामाजिक है, जिसमें बहुविवाह को समाज में समाजिक स्थिति का प्रतीक माना जाता है। इसके आलावा, गुण मिलने पर बहुविवाह से एक पुरुष को अधिकार मिलता है कि वह अपनी पत्नियों के साथ सही से देखभाल करें और उनका आदर करें।

विवाद:

हालांकि बहुविवाह का इतिहास और कारण विश्वस्त दिखाई देते हैं, यह प्रथा कई विवादों से घिरी हुई है। इसके खिलाफ विचारधारा और सामाजिक संविदान के पक्षधरों का कहना है कि यह महिलाओं को अन्याय का शिकार बनाता है और उनके अधिकारों को कमजोर करता है।

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