Mar 09, 2026

भारतीय न्याय संहिता को धरातल पर उतारने में उत्तराखंड अव्वल: अमित शाह ने की देवभूमि की कार्यकुशलता की सराहना

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देहरादून। भारत की न्यायिक और कानून प्रवर्तन प्रणाली के आधुनिकीकरण की दिशा में उत्तराखंड ने एक ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित किया है। इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) 2.0 के राष्ट्रीय कार्यान्वयन में उत्तराखंड ने देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त कर देवभूमि का मान बढ़ाया है। जनवरी 2026 तक के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड 93.46 के उत्कृष्ट स्कोर के साथ राष्ट्रीय रैंकिंग में शीर्ष पर काबिज है। यह गौरवपूर्ण उपलब्धि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दूरदर्शी मार्गदर्शन और तकनीक आधारित न्याय प्रणाली के संकल्प का प्रतिफल मानी जा रही है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा जारी प्रोग्रेस डैशबोर्ड के अनुसार, इस कड़ी प्रतिस्पर्धा में हरियाणा 93.41 के स्कोर के साथ दूसरे, असम 93.16 के साथ तीसरे, सिक्किम 91.82 के साथ चौथे और मध्य प्रदेश 90.55 के स्कोर के साथ पांचवें स्थान पर रहा है। उत्तराखंड की इस अभूतपूर्व सफलता का मुख्य श्रेय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व और निरंतर निगरानी को जाता है। भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) जैसे नए कानूनों को धरातल पर प्रभावी ढंग से उतारने के लिए मुख्यमंत्री ने स्वयं कमान संभाली। उन्होंने शासन के शीर्ष अधिकारियों से लेकर जनपद स्तर के फील्ड अधिकारियों के साथ निरंतर समीक्षा बैठकें कीं। इसी सूक्ष्म मॉनिटरिंग के कारण तकनीकी बाधाओं को समय रहते दूर किया जा सका और पुलिस विभाग नए कानूनी ढांचे के अनुरूप स्वयं को ढालने में सफल रहा।

उत्तराखंड की इस उपलब्धि का मुख्य आधार आईसीजेएस 2.0 की 'वन डेटा वन एंट्री' प्रणाली है। इसके तहत पुलिस, ई-कोर्ट, ई-जेल, ई-अभियोजन और ई-फॉरेंसिक के बीच डेटा का निर्बाध प्रवाह सुनिश्चित किया गया है। एक बार डेटा दर्ज होने के बाद वह सभी संबंधित विभागों को तुरंत उपलब्ध हो जाता है, जिससे कागजी कार्रवाई में भारी कमी आई है और मुकदमों के निस्तारण में तेजी आई है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 'ई-साक्ष्य' ऐप के माध्यम से अपराध स्थल की वीडियोग्राफी और डिजिटल साक्ष्यों का सुरक्षित संग्रहण अनिवार्य किया गया है। इस सफलता के पीछे व्यापक प्रशिक्षण की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रदेश के 23,000 से अधिक पुलिस कर्मियों को नए कानूनों की बारीकियों का गहन प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही, 'न्याय श्रुति' के माध्यम से वर्चुअल अदालती सुनवाई और फॉरेंसिक मोबाइल वैन की उपलब्धता को प्राथमिकता दी गई। उत्तराखंड पुलिस के प्रवक्ता और पुलिस महानिरीक्षक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) सुनील कुमार मीणा ने इस रैंकिंग की पुष्टि करते हुए कहा कि राज्य ने तकनीकी बुनियादी ढांचे को लागू करने के साथ ही रीयल-टाइम डेटा एंट्री में भी रिकॉर्ड स्थापित किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी उच्च स्तरीय बैठकों में उत्तराखंड की इस कार्यकुशलता की विशेष रूप से सराहना की है। इस समन्वय और तकनीकी प्रतिबद्धता के साथ उत्तराखंड आज पूरे देश के लिए 'स्मार्ट पुलिसिंग' का एक आदर्श मॉडल बनकर उभरा है। यह उपलब्धि न केवल न्याय प्रक्रिया को तेज करेगी, बल्कि आम जनता के लिए न्याय को अधिक सुलभ और पारदर्शी भी बनाएगी।